क्या हुआ ज़ख़्म जो गहरा है ।

ये भी तो ख़ुदा का फ़ैसला है ।।

यहाँ कौन जो अपना समझे ।

पास मेरे, मतलब से पहरा है ।


#हनीफ़_शिकोहाबादी✍️


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