सूरज डूब चुका घना अंधेरा सर पर है,

अंधेरी रात में अन्जान सा पहरा हम पर है ।।


ओ चाँद तुम आज ऐसे क्यूँ सो गए हो,

क्या तुम भी किसी के सपनों में खो गए हो ।।


लगता है तुम्हें भी किसी से इश्क़ हो गया है,

हमारी तरह तुम्हारा भी दिल खो गया है ।।


चाँद उठो और बतला दो कौन है वो ज़रा,

ऐसे सोने से कैसे चलेगा कोई काम भला ।।


ऐ चाँद हम उससे तुम्हारे बारे में बात करेंगें,

रब से तुम्हारी लिए हम सब फ़रयाद करेंगें ।।


#हनीफ़_शिकोहाबादी ✍️


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