
हर और एक ही समाचार है,
देश का युवा बेरोज़गार है ।।
एक एग्ज़ाम करा नहीं पाते,
ये पूरा सिस्टम ही बेकार है ।।
मज़लूम को सताया जा रहा,
और अमीरों का बेड़ापार है ।।
कहाँ कुछ भी देख पाती है
अंधी हो चुकी ये सरकार है ।।
शख़्स जो बे-मौत मर जाए,
समझो मजबूर-ओ-लाचार है ।।
हर सिम्त एक कोहराम मचा,
पर दिखता नहीं हाहाकार है ।।
तमाशा बना दिया जनता का,
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