#मेरी_अपनी_ग़ज़ल
कब मुझको वो मेरा रहबर मिलेगा,
कितना सहूँ, कितना सहकर मिलेगा !!
तेरी मर्ज़ी तू लाख सितम कर मुझपे,
पर एक ग़म न तुझको सितमग़र मिलेगा !!
उसी का होके रहा जिसने ठुकराया,
दुनियाँ में कहाँ ऐसा दिलबर मिलेगा !!
माँगी दुआएं तेरे लिए तेरी चाह में,
इसका कभी तो ख़ुदा से असर मिलेगा !!
अपना लिया तुझको अपना ले तू भी,
कहाँ तुझको ऐसा हमसफ़र मिलेगा !!
बचाके रखेगा हर नज़र से छाँव में 'हनीफ़',
ज़माने में तुझे कहाँ ऐसा शजर मिलेगा !!
#हनीफ़_शिकोहाबादी✍️
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