#मेरी_अपनी_ग़ज़ल✍️
आँखों का अश्क़ बहाना समझ किसे आया है,
मेरा उसका हो जाना समझ किसे आया है !!
दिल की गुस्ताख़ी कि इस मुक़ाम पे लाया,
इसका मुझको तड़पाना समझ किसे आया है !!
दर्द ही दर्द रहता है अपना कौन कहता है,
हर आह पे आँसू बहाना समझ किसे आया है !!
फ़र्ज़ की ख़ातिर ग़रीब, बेकसूर से तोड़ा रिश्ता,
यार ऐसा फ़र्ज़ निभाना समझ किसे आया है !!
हनीफ़` सिसक-सिसक कर तड़प-तड़प कर,
मेरा हर दुःख सह जाना समझ किसे आया है !!
#हनीफ़_शिकोहाबादी✍️
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