तेरी आँखों के समन्दर में उतरना है, मुझको मधुशाला नहीं पीना है !! एक ज़ख़्म तेरा मुझको गवारा नहीं, हर ज़ख़्म तेरा मुझको सीना है !! मुझको मधुशाला नहीं पीना है......!! हो जाये ग़र चाक गिरेवां नहीं डरना, तुझको अपनी ही बांहों में अब भरना है !! नहीं सुनता किसी की दिल-ऐ-नादान, इसको तो सिर्फ तेरी ही आरज़ू करना है मुझको मधुशाला नहीं पीना है........!! हर ज़ख़्म तेरा, गवारा है मुझको, पर साथ तेरे ही रहना है !! मेरी आँखों में दिख जाएगी तुझको, सदा ऐसी मोहब्ब्त करना है !! मुझको मधुशाला नहीं पीना है ........., तेरी आँखों के समन्दर में उतरना है !!