इस दिल की लगी को दिल से भुला डाला, मैंने जिसको चाहा मुझे उसी ने मिटा डाला !! बाहर के मौसम में भी बहार खिलने नहीं दी, दवा की शीशी में ज़हर दे के पिला डाला !! किसी ने गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी, मैं उठता भी कैसे मुझे अपनों ने हरा डाला !! ख़्वाहिश है मेरी काश वो मेरा हमसफ़र बने, इस ख़्वाहिश ने मेरी क्या से क्या बना डाला !! याद करता 'हनीफ़' सबको सुबह-ओ-शाम, अफ़सोस आज उसी को सबने भुला डाला !!