ख़्वाहिश बे-हिसाब लिखती है, मेरे ख़तों के जवाब लिखती है !! वो नहीं लिखते तो क्या हुआ, ख़्वाहिश लाजवाब लिखती है !! गुल-फ़िशाँ से महकता चमन, क़बा-ए-गुल शबाब लिखती है !!