सीने में लगा ज़ख़्म बड़ा गहरा है, एक दर्द है जो दिल में ठहरा है !!
कभी निर्भया, कभी आसिफ़ा, क्यूँ बेटियों पे होता ये हमला है...??
कभी तेज़ाब, कभी कोई जुल्म, जीवन को उनके हरपल ख़तरा है !!
कब तक ईमान बेच रखोगे अपना, क्या बेटियों का जीवन सहरा है...??
शायद लोगों की ग़ैरत मर चुकी, इनका बस मज़हब तक पहरा है !!
है इंतिज़ार में कब से उसके 'हनीफ़', लगता है चौकीदार भी गूंगा-बहरा है...??


