सरहदे....
आये दिनों कुछ अजीब होनेवाला है।
शहरों की जगह जंगल होनेवाला है।
सरहदों पर जोती जा रही है बारुदों की फसल,
लगता है कि तुफां बेमिसाल होनेवाला है।
अब की बार हवाओं से यूं बदल गया है मौसम,
जैसे फिर से मुल्कों का बंटवारा होनेवाला है।
इन्सान इन्सानियत को मिटाकर इस साल,
कोई हिन्दू कोई मुसलमान कोई ईसाई होनेवाला है।
कवीराज (हणमंत यादव).
