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सच्चाई...


यहां कितने सुरज रोने लगे है।

अंधेरे चारों ओर फैलने लगे है।


चिंगारियों कि तो निकल पडी है,

बाप बेटों को अब खोने लगे है।


दहलीज ए दरीया चली है आवाम,

हकीम ही खुद अब सो

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