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राहत.....


इक दरिया सिमट गया काल के कपाल मे,अब लहरों का कोई मतलब नही।लाख नदीया बहती है लब्जों कि राहत,तेरी गजल बिना उनका कोई मतलब नही।...

कवीराज

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