तेरी सुर्ख आंखों मे ये नमी क्यू है।
सबकुछ होकर भी दिल मे कमी क्यू है।
सच में नही है तुम्हे मोहब्बत मुझसे,
तो इस तरह आधी राह में तू थमी क्यू है।
मै तो गुमनाम अकेला आसमान हूं,
ये बता के तू यहां जमीं क्यू है।
अपनी अपनी शाख पर चले गए सब परींदे,
तो हम दोनों की रफ्तार इतनी धीमी क्यू है।...
©कवीराज (हणमंत यादव)
