इस मिट्टी को आसमान बना दिया जाए।
सोचता हूं के तुझसे इश्क किया जाए।
चांद, चांदनी, आफताब किस किसको ला दू मैं,
कहे दू के एक घर वही बना दिया जाए।
जब चाहे तारोंसे, सितारोंसे, बाते करो तुम,
सारे आसमां को ही महफ़िल बना दिया जाए।
पकडकर मेरी बाजूओंको मेरी बाहों मे सिमट जा,
छू कर तेरे अदरों को इश्क मुक्कमल किया जाए।
कवीराज (हणमंत यादव)


