मेरी महबूबा क्यु मुझसे खपा हो गई।
क्या पता कौनसी हमसे खता हो गई।
रुठ गई हमसे जमीं, ये आसमां तारे सभी,
जिंदगी मुझसे मेरी यहां बेवफा हो गई।
धड़कता नहीं दिल मेरा नाराज है मुझसे सनम,
धड़कने दिल से मेरे क्यू दफा हो गई।
आ भी जा अब मेरी जां तेरेसीवा मै हू नहीं,
अकेले में ढल गया दिन अब रात हो गई।...
कवीराज (हणमंत यादव) ९०२१०३४९१७.


