जुमला- ए -दहशत....


जुमले बाजों की जुबां पर

 बेहद रहती है।

चुनाव आते ही

 सीमा पर दहशत रहती है।


हवाओं के संग 

यू तब्दील हो जाता है मौसम,

जैसे दहशतगर्दी कि चाबी 

उनके जेब मे रहती है।


अब चुनाव नही तो

 बहुत प्यारा माहौल होगा वहा,

जैसे एक दिन दिवाली

 एक दिन ईद रहती है।


एक जुमला बन के रह जाता है

 मिट्टी के सपूतों का खून,

जवानों के शहादत कि फिक्र 

अब किसी को नही रहती है।


दोनों तरफ के बारुद

 अच्छे-से जानते है एक-दूसरे को,

उनको चलाने कि साजीश

 तख्तों के नीचे रहती है।...


कवीराज(हणमंत यादव)