उठो कि चीर दो तुम सीना-ए-समंदर को
बढ़ो कि सर करें सहरा-व-दश्त मिल कर हम
चलो चलो कि पहाड़ो पे अपना पहरा हो
रुको कि देख लो छूटे ना कोई भी साथी
ज़मीन कैसी, फ़लक पर भी राज करना है
तुम्हें फ़िज़ाओं में भारत का नाम लिखना है
सुनो सुनो, करो रौशन चिराग़े इल्मो हुनर
बताओ दुनिया को फ़ाक़ों से कैसे बचना है
सिखा दो दुनिया को करते हैं किस तरह उल्फ़त
दिखा दो दुनिया को हम कैसी शान वाले हैं
ज़माने भर की निगाहें तुम्हारे ऊपर हैं
तुम ही को आज क़यादत जहां की करना है
कोई भी क़ैद नहीं और कोई भी ख़ौफ़ नहीं
ख़ुशी है हम को कि आज़ाद हिन्द वाले हैं
हफ़ीज़ बिन अज़ीज़