मिथ्या कोईकवच नहीं है।रूढ़ होना भी,सच नहीं है।असंख्य सपनेअर्थ नहीं हैं।अकेली मंज़िल,अनर्थ नहीं है।कथनी कोईफ़र्क नही है।करनी सरल,कुतर्क नहीं है।
मिथ्या कोईकवच नहीं है।रूढ़ होना भी,सच नहीं है।
असंख्य सपनेअर्थ नहीं हैं।अकेली मंज़िल,अनर्थ नहीं है।
कथनी कोईफ़र्क नही है।करनी सरल,कुतर्क नहीं है।