घर पहुंचते ही मेरे वो पसंद की सब्जी ले आते है 

वो पिता है प्यार कहां जताते हैं

मुझे छोड़ने आने पर पलट कर नहीं देख पाते हैं

वो पिता हैं आंसू कहां बहाते हैं

मेरे हाथ के बने खाने में कमियां कहा बताते हैं

वो पिता हैं सच कहां बताते हैं 

मेरे लिए उनकी जेब हमेशा भरी ही लाते हैं

वो पिता हैं मन का कब जताते हैं 

मेरे कुछ अच्छे काम पर खुश हो जाते हैं 

वो पिता हैं इस खुशी को भी छिपाते हैं