बदल गए जीवन के भूगोल के रिश्तों के मानचित्र उलझे  हैं लोग अब दिल की सरहदों की लड़ाई में बाजारों में मिट्टी खिलौनों बेचने वाला बस ये सोचता है  कैसे लाये वो अपने बच्चों के खिलोने इस कमाई में बहुत लोगों के अंदर मैंने दुनियादारी जब बंनती देखी अपनी दुनिया छिपा ली मैंने अपनी ही परछाई में जब से धुंए ने आसमान में चलना फिरना सीख लिया कहाँ से लाये शीतलता के खुश्बू बहती हुई पुरवाई में रोगीले लोगों की किस्मत में बस ताने मीखांने भरे हुए हैं दुआओं की एक खुराक चाहिए बस उनकी दवाई में जब भी सोचा कि मैं खुद से खुद की एक गहरी बात करूं औरों की कुछ बातों के चलते ये बात पड़ गई खटाई में