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अगले जन्म मोहे...

Gunjan VishwakarmaGunjan Vishwakarma March 14, 2022
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ये अंधेरा उस अंधेरे से अलग था
जहां से मैं आई थी 
इस अंधेरे में निर्दयी ठंडक थी
भय था जीवन के अंत का ।

उस अंधेरे में भी नहीं दिखता था कुछ
पर वहां ऊष्मा थी
प्रेम की, 
एक जीवन डोर थी
जिससे जुड़ा होना
संकेत था मेरे जीवित होने का ।

पता नहीं 
मेरे हृदय में स्पंदन था या नहीं
पर एक ध्वनि निरंतर
मुझे आश्वासन देती थी
कि एक जीवन 
मेरी प्रतीक्षा में है ।

फिर एक दिन सुने
मैंने सुने शब्द
जिनके अर्थ मुझे ज्ञात नहीं थे
मेरी तरह मेरा ज्ञान भी संकुचित था ।

भाषा और व्याकरण 
नह

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