ये कविता नहीं है,

सिर्फ किसी के मन का हाल है।

ये तो सिर्फ कलम से निकली,

दिल की आवाज़ है।

वो बात है जिसको

बोलने से होंठ इन्कार कर देते हैं,

पर हाथ उसको लिखने को राज़ी होते हैं।

ये तो सिर्फ दिल की आवाज़ है,

जो चोट लगने पर होता है।

ये तो सिर्फ दिल की खिलखिलाहट है,

जो तब होती है जब मन को कोई गुदगुदाता है।

सच में, ये कविता नहीं है,

ये तो बस किसी के मन का हाल है।