कलम लिखने को आतुर है
स्याही प्रवाह को तत्पर
अक्षर उन्नति को अग्रसर
शब्द खोज रहे मंजर हैं
कैसे लिखें
क्या लिखें
क्यों लिखें
निर्जन मरू
शून्य क्षितिज
व्यर्थ लक्ष्य
कैसे लिखें
क्या लिखें
क्यों लिखें
बिके विचार
बंधी सोच
बेमतलब रसूख
कैसे लिखें
क्या लिखें
क्यों लिखें
गहरा घाव
गुज़रा वक्त
गुम बोध
कैसे लिखें
क्या लिखें
क्यों लिखें
सादी बातें
सोती आंखे
सहमी यादें
कैसे लिखें
क्या लिखें
क्यों लिखें
थका सन्
थमा मन
थोड़ा फन
कैसे लिखें
क्या लिखें
क्यों लिखें
बदचलन सफर
बदनाम शहर
बदनसीब पहर
कैसे लिखें
क्या लिखें
क्यों लिखें
कब पढ़ेगा
कैसे सुनेगा
कौन समझेगा ...
यकीन है ये अँधेरा जल्द नहीं छटेगा
जो अब हम कुछ भी लिखें ...


