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नज़र


नज़र को नज़र की ,नज़र लग गई,

लगी तो इस कदर लग गई,गोया कल्ब-ए-गदर कर गई ,

गदर इस कदर कर गई,अब हर नज़र में ,

नज़र, वही नज़र ढूंढती है,जो कमबख्त गदर कर गई

— ©गुमनाम लखनवी
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