तेरी खामोशियां मेरी खामोशियों से पूछती हैं , तेरी खामोशी का राज़ क्या है ? दिल ने खामोशी से कहा ए हम -नफ़स , छेड़ कर राग मत पूछ ये साज़ क्या है . ©गुमनाम लखनवी