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ढूंढता हूं


गुम जो हुआ है, वो पुराना दोस्ताना ढूंढता हूँ,उजड़े चमन में बहारों का आशियाना ढूंढता हूँ।कभी ढूंढता हूँ मैं उसको उस गुज़रे दौर में,तो कभी खुद में ही छुपा वो ज़माना ढूंढता हूँ।© गुमनाम लखनवी

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