वक़्त को आते न जाते न गुज़रते देखा - गुलज़ार's image
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वक़्त को आते न जाते न गुज़रते देखा - गुलज़ार

वक़्त को आते न जाते न गुजरते देखा न उतरते हुए देखा कभी इलहाम की सूरत जमा होते हुए एक जगह मगर देखा है शायद आया था वो ख़्वाब से दबे पांव ही और जब आया ख़्यालों को एहसास न था आँख का रंग तुलु होते हुए देखा जिस दिन मैंने चूमा था मगर वक़्त को पहचाना न था चंद तुतलाते हुए बोलों में आहट सुनी दूध का दांत गिरा था तो भी वहां देखा बोस्की बेटी मेरी ,चिकनी-सी रेशम की डली लिपटी लिपटाई हुई रेशम के तागों मे
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