’जोरहट’ में एक दफ़ा दूर उफ़क के हलके-हलके कुहरे में ’हमीन बरुआ’ के चाय बाग़ान के पीछे चांद कुछ ऎसे दिखा था जैसे चीनी की चमकीली कैटल रखी हो!