नज़्म
ख़ुबसूरत क्या है
उसके नैना
तो पागल क्या है
मेरे नैना
क्या करते हो
उससे मोहब्बत
भाड़ में जाओ
ये न कहना
वो क्या है
मझधार समझ लो
तुम क्या हो
किनारा समझ लो
उबको क्या कहें
आफ़ताब कह दो
इससे अलग
गुलाब कह दो
फ़िर भी क्या कहें
ख़्वाब कह दो
ख़्वाब कह दो
ख़्वाब कह दो

