जो दिल को तोड़ के जाते हैं वो दिल का टूटना क्या जाने,
हम तुमको रोज़ मनाते हैं हम तुमसे रूठना क्या जाने।
तुम अपनी निगाहों से मारो या क़त्ल मुझे करवा दो सनम,
जो इश्क़ में तेरे खुद हो फिदा वो क़त्ल कराना क्या जाने।
ज़ालिम की अदाएं सुभानल्लाह और नखरे तो हैं माशाअल्लाह,
हमसे नखरे उठवाती हैं हम नखरे उठाना क्या जाने।
वो कहते हैं मिलना न कभी और बात नहीं करना हमसे,
हम देख के पागल होते हैं हम बातें करना क्या जाने।
कुछ लोग उठा कर पर्दे को दीदारे सनम के आशिक हैं,
वो पर्दे में हैं हम लूटते हैं हम पर्दा उठाना क्या जाने।


