लम्हा उनसे नजर मिलाने का,
दिल किया उनसे दिल लगाने का।
मौत को हमने रोक रखा है,
उनका वादा है लौट आने का।
दिल में हसरत थी एक झलक देखूं,
अपने जाना के मुस्कुराने का।
उनसे मिलने की बात की हमने,
जाने क्यों दिल जला जमाने का।
सामने तेरे घर के बैठा हूं,
हाल तो पूछ ले दीवाने का।
हौसला प्यार का दिखाओ तो,
वादा करता हूं मै निभाने का।
तुमने फिर नज़रें फेर लीं हमसे
क्या कसम खायी हो सताने का।
रूठ जाते हैं हमसे वो जैसे,
ठेका दे रखा हो मनाने का।
आजमा लो तुम अपना तेगे नजर,
आज इरादा है सर कटाने का।
वारसी बस करो न बतलाओ,
वक़्त लंबा हुआ फसाने का।
~गुलाम वारिस "वारसी"


