***अंतिम यात्रा***

वह आदमी जिसने जीवन भर साथ निभाने का वादा किया होगा, जिसके साथ सात फेरे लिए होंगे …..पंडित के बोले सात वचन दोहराए होंगे; आज वह आदमी तो प्रेम के तराजू पर मजनू , रांझा और शाहजहाँ से भी आगे निकल गया। वह ग़रीब आदमी , जिसकी पत्नी ने आज सुबह तड़के टी बी से दम तोड़ दिया …बीमार सरकारी अस्पताल में।

दरअसल असली टीबी उस औरत को नहीं थी। अस्पताल के अधिकारियों , कर्मचारियों की आत्मा को टीबी का रोग होगा या यूं कहे टी बी से ग्रसित हमारा टोटल सिस्टम। विशाल महान तंत्र.

हाँ तो उस ग़रीब की औरत मर गयी ….जैसे मरते हैं मवेशी …जैसे मरते हैं कीड़े मकोडे …..अस्पताल वालों ने जी भर कर रोने भी ना दिया। अस्पताल का स्टाफ बोला उस आदमी को , उसकी किशोर बेटी को --"तुरत रफ़ा दफ़ा करो………….खर्चा पानी लाओ" ……. ग़रीब आदमी जिसकी गोद में मृत पत्नी का सिर था …..उसने रिरियाते हुए कहा - "बाबू ..पैसा होता तो क्या टी बी से मरने देता ….अपनी भगवंती को" बेटी भों -भों कर रोये जा रही थी.

नर्स उसे डांटती हैं “ कीप साइलेन्स”.

जूनियर डाक्टर हड़काता हैं। उसके सुर में सुर मिलाते हुए …तंबाखू ख़ाता वॉर्ड बॉय कहता है - " जल्दी बेड खाली करो. एक अधेला पैसा नहीं दिया ….और मुर्दे को लिटाये हैं। नया मरीज़ बाहर खड़ा हैं। नए मरीज के परिजन ने 1000 रुपये अड्वान्स में दिए है। ”

वह ग़रीब आदमी …. लोकतंत्र की तरह पराजित दिख रहा था। सत्य की तरह परेशान और इंसानियत की तरह दयनीय। वह अपनी मरी पत्नी का सिर गोद से बिस्तर पर रख कर उसका मुँह देखता हैं। औरत की माँग में टह-टह लाल सिंदूर दिखता हैं; और एक हरी बिंदी . "बेचारी मेरे साथ बहुत दुख काटी । भगवान जगन्नाथ इसकी आत्मा को शांति दे." वह मन ही मन सोचता है.

वह आँसू बहाती अपनी बेटी को पुचकारता है और उससे कहता हैं , “ चल बिटिया झोला- झाकड़ उठा। मैं बाहर जाकर तेरी माँ को ले जाने के लिए किसी वाहन का बंदोबस्त करता हूँ।

बाहर वह अस्पताल के डेप्युटी - इंचार्ज से मिलता हैं। डेप्युटी- इंचार्ज कहता हैं कम से कम 1000 रुपये रखो तब अम्बुलेन्स देंगे। वह गिड़गिडाता है। बड़ा साहब उसे दुत्कारता हैं “ क्या पेट्रोल की जगह तुम ग़रीबों के आँसू डलवाऊं , एम्बुलेन्स की टंकी में.” यह कहकर साहब अपने वॉटस्सॅप पर व्यस्त हो जाता हैं.

एक आदमी उस गरीब को धीरे से कोने में ले जाता है , “ , बस बोतल भर का इंतेज़ाम करवा दे मैं चुपके से ड्राईवर को पटा लूँगा।"

वह जिसकी अर्धांगिनी ने अभी -अभी दम तोड़ा हैं ; जिसे अभी अर्थी का इंतज़ाम करना हैं . दाह संस्कार करना हैं. उसे दारू के बारे में .......... . उसके पास टुडे-मुड़े केवल 100 रुपये थे । वह दलाल नहीं माना.

हारकर वह लौटा तो देखा …अस्पताल के स्टाफ ने उसकी पत्नी की लाश को ज़मीन को रख दिया है.

वॉर्ड बॉय चिल्लाता है , “अबे ले जा नहीं तो चील ,कौओ में डलवा दूँगा।”

उसने सिसकते हुए अपने थैले से दो मैली -कुचैली धोतियाँ निकाली और उसमें अपनी पत्नी के निर्जीव देह को लपेटा। उसकी बेटी और ज़ोर ज़ोर से रोने लगती हैं। वह कहता हैं ," मत रो गुड़िया….तेरी माँ की आत्मा को दुख होगा।"

वह मैली धोतियों में लिपटी लाश को कंधे पे उठाता है . लाश उठाने में उसकी बेटी मदद करती हैं। बेटी के हाथ में झोले और थैले हैं।

वह अपने मजबूत कंधे पर पत्नी को किसी पेड़ के कटे तने सा लादे वहाँ से निकलता हैं। उसका गाँव वहाँ से कोई 10-12 किलो मीटर दूर है। रास्ते में कुछ लोग बताते है नज़दीक में श्मशान है; क्रियाकरम कर दे ; मगर वह कहता है -" उसकी पत्नी की ख्वाहिश थी कि गाँव में ही उसकी मिट्टी सधे ।"

इस अजीब से यात्रा को लोग घूरते हैं। कुछ अजीब -अजीब से कयास लगाते है। कुछ पागल समझते हैं। रास्ते मे जगह -जगह चमकते विकास के बड़े -बड़े बैनर दिखते है . देश में स्वास्थ्य सुविधाओं के गुण गाते नेता मंत्री के हँसती हुई तस्वीर के साथ . ----108 नंबर की सुविधा का निशुल्क लाभ उठाए----

रास्ते में खड्डे थे। वह खड्डे से बचता हुआ चल रहा है। वह जितने कदम आगे चल रहा था मानो …हमारा असंवेदनशील समाज उतने वर्ष पीछे पतन की ओर बढ़ रहा था। बीच में एक जुलूस भी गुज़रा ….उसे रास्ता देने के लिए उसे कुछ देर रुकना पड़ा.

बेटी रोती हुए बीच बीच में दौड़ती वह अपने पिता के तेज़ कदमों से बार बार पीछे छूट जा रही थी.

मीडिया को जब यह बात पता लगी तो उनकी बाँछे खिल गईं . वे फ़ौरन अपने ओ वी वैन के साथ रवाना हुए। पूरे रास्ते मीडीया की गाड़ी पीछे पीछे चलती रही … कैमरे से रेकॉर्ड करती रही . तस्वीरे खींचती रही. लच्छेदार शब्दों में “ अंदाज-ए-बयान” करती रही. डिजिटल आँसू भी बहने शुरू हुए . ट्वीटस् की बाढ़ आ गयी। वे पति पत्नी पूरे देश में “ वायरल “ हो गये। जिसमे एक जिंदा था ….इस देश की महान जिजीविषा की भाँति और एक मरी हुई….आज के समाज की आत्मा की तरह।

पूरे तंत्र से एक गूँज सुनाई दे रही थी , “ राम नाम सत्य है , राम नाम सत्य है।”

लेखक :- गौतम कुमार सागर ( 7903199459)