यात्रा - मन की यात्रा बड़ी ही सरल और सुखद है अगर आपको अपना गंतव्य स्थान पता हो। इस यात्रा के लिए बटुए की ज़रूरत नहीं पड़ती इसका आनंद हर वर्ग के लोग उठा सकते है। इसमें आप जितनी लंबी चाहे जँहा चाहे उतनी यात्रा कर सकते है। मन की यात्रा का गंतव्य असीमित है। हमारे मन का इंजन बड़ा विशाल और शक्तिशाली होता है । ये मन के डिब्बे को कई सारे भावनाओं को एक साथ खींच सकता है। और इसकी रफ़्तार आपकी मनमर्जी के अनुसार चलती है। इसके संचालक आप ख़ुद होते है। ये यात्रा कितने लोगों के मन के शहर और गाँव को जोड़ सकती है। मन की खोज में मन की यात्रा का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान है। मन की यात्रा के दौरान जो छुक-छुक की आवाज़ सुनाई देती है वो बड़ी ही मार्मिक और लुभावनी होती है। ये एक साथ कई पटरीयों पर चलती है। और टकराती भी नहीं बल्कि चुपके से अपना रास्ता बना के अपने गंतव्य पर चल पड़ती है, बिना किसी दुर्घटना के। इस यात्रा में अपने हाल्ट का निर्धारण भी आप ख़ुद ही कर सकते है। जिस हाल्ट पर जितनी देर चाहे रुक सकते है। इस यात्रा में किसी भी यात्रीगण को किसी भी रेलगाड़ी की प्रतिक्षा नहीं करनी पड़ती है। ये आपकी रेलगाड़ी होती है और अपनी इस रेलगाड़ी के संचालक, टी°टी और सीटी सब आप हीं होते है। यँहा टी°टी आके आपकी यात्रा में विघ्न भी नहीं डाल सकता ना हीं कोई चेन खींच के रेलगाड़ी को रोक सकता है। 

बस मन की यात्रा के लिए धैर्य जैसी पूंजी का होना ज़रूरी है। क्योंकि मन चंचल होता है। उसकी नज़र रास्तों से ज़्यादा मंज़िल पर होती है। इस यात्रा का अपने जीवन में भरपूर आनंद उठाइए।आशा करती हूँ आपकी यात्रा मंगलमय हो।