Poetry 1 min read 14.9K reads

मैने देखा है


मैने खुद को टूटते देखा है,मेरे ख़ुदा को मुझसे रूठते देखा है,

मेरी आँखे यूँही नम नहीं है,किसी ओर के लिये उसका हाथ मेरे हाथ से छूटते देखा है ।

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