मैने खुद को टूटते देखा है,मेरे ख़ुदा को मुझसे रूठते देखा है,मेरी आँखे यूँही नम नहीं है,किसी ओर के लिये उसका हाथ मेरे हाथ से छूटते देखा है ।
मैने खुद को टूटते देखा है,मेरे ख़ुदा को मुझसे रूठते देखा है,
मेरी आँखे यूँही नम नहीं है,किसी ओर के लिये उसका हाथ मेरे हाथ से छूटते देखा है ।