हम अपने सिर को कटाने चले हैं। हम धरती मां को बचाने चले हैं।।   आज मां ने बुलाया चले आए हैं। जान अपनी हथेली पे ले आए हैं। तेरे लिए चाहें मिटना पड़े। सौ जन्म ले लेके मरना पड़े। जज्वा है कितना बताने चलें हैं। हम धरती मां को ............   बहुत हो गया आत्महत्या करो न। हे धरती के पुत्रों तुम ऐसे मरो न। ऐसे न जीवन को बर्बाद कर लो। आ जाओ धरती को आजाद कर लो। हम तो इरादे जताने चलें हैं। हम धरती मां.........   जो सूखेगी डाली तो गुल न खिलेगा। ये इंसा का जीवन फिर न मिलेगा। ये जीवन है अनमोल न धिक्कार पाओ। सभी से गुजारिश है आओ जी आओ। हम औकात उनकी दिखाने चले हैं। हम धरती मां को........