जब से मिली हो तुम  ज़िंदगी हुई रोशन,

तेरे रूप के आगे गुलशन लगे फीका।


पाया है जब से तुम्हे घर मे हुई है रौनक,

फूल बगीचा सब वीरान नज़र आये।

~गोपाल भोजक