ख़ुद को न छिपाया करो,

यूं ही खिलखिलाया करो।


रेत से तपते जीवन मे,

प्रेम रस बरसाया करो।


तन्हा गुज़रती रातों में,

ख्वाब बन के आया करो।


हम तुम, तुम हम दो क्यो है,

कभी एक बन जाया करो।


~गोपाल भोजक