तेरी यादों का सिलसिला थमता नही,

दिल की तमन्ना कभी बुझती नही।


बारिश का ये मौसम किस तरह गुज़रेगा,

बदन में दौड़ता लहू उबल रहा है।


©गोपाल भोजक