Poetry 1 min read 816.7K reads

विरह...


सावन आया सजन न आये,

क्या तू उनकी लाया पाति!

ओ भँवरे सच सच बता,

कैसे जले दीया बिन बाति!

अंगड़ाई के साथ मिलन की,

रात याद सताती तड़फती...

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