तुमको पाने की भी जिद थी,

आसमान में उड़ानों की जिद थी।


जब हम मिले थे ऐसा हुआ,

गरजते बादलों की सांसे थम गई।


सुनाई देती तुम्हारी सिसकियां,

बाकी सब आवाजे जब मौन हुई।


जब मेरे चाँद से मिलन हुआ,

वो मुलाकात बहुत खास हुई।


याद आता है मुझे वो लम्हा,

तुम जब सहम के मेरी हुई।


आज फिर दिल मचल रहा है, 

याद फिर आई उस मुलाकात की।


आ के तोड़ दे गुरूर बादलो का,

आज फिर बारिश बेहिसाब हुई।


न जाना दूर कभी तुम मुझसे,

सांसों का थमना सहन नही होगा।


~गोपाल भोजक