तुम रूठना मत


मेरे पहलू में ही रहना,


न फेर लेना तू मुँह मुझसे


मैं करवट बदल के सो लूंगा,


मुझे आता है तमको मनाना भी,


तू रोज यूं ही शिकायत कर लेना...


~गोपाल भोजक