कतरा-कतरा तू राधे हो,
बून्द बून्द मैं कृष्ण बनूं।
आहिस्ता से इक दूजे में बसे,
तुम मैं और मैं तुम बनूं।
खाली बर्तन सी देह तेरी में,
मैं बून्द बून्द टपकता रहूं।
हौले हौले कुछ तुम बोलो,
धीमें धीमें कुछ मैं भी कहूं।
लहू की तरहां जिस्मो में,
तुम मुझमें मैं तुझमें में बहूं।
अंग अंग मैं तेरा छू लूं,
रोम रोम मैं तेरा बनूं।
मैं गरज बरस घटा सा बरसूं,
जिस्म की तेरी प्यास बुझे।
इक दूजे की धड़कन की तरहां,
तू मुझमें मैं तुझमें रहूं।


