दिल ये कुछ वक्त ऐसा चाहे,
दोनों सुकून से जो साथ बिताये।
रात भर करवटें बदलता हूँ,
कभी तो सुकून की नींद आये।
मेरे कांधे को तकिया बना के,
बदन पे मेरे तू उंगलियां घुमाये।
तुम मैं और मैं तुम हो जाये,
फ़ासले हमारे सभी मिट जाये।
कभी तो वो हसीन सुबह आये,
तेरे हाथों की चाय से मेरी आँख खुले।
~गोपाल भोजक


