तेरे हुस्न की क्या मैं तारीफ करूँ,

देख के आईना भी शरमा जाएगा।


मैं पीता नहीं हूँ फिर भी नशे में हूँ,

अपनी नज़रें जरा झुका दीजिये।


जख्म इस दिल के भी भर जायेगें,

एक बार बस आप मुस्कुरा दीजिये।


तेरी आहट सुनके लगता है ये,

जैसे कयामत मेरे करीब आ गई।

©गोपाल भोजक