Poetry 1 min read 804.5K reads

सुर्ख़ गुलाब


साख पे खिला ये सुर्ख़ गुलाब,

जैसे बच्चा कोई मुस्कुरा रहा है।

~गोपाल भोजक

सुबह का सौंदर्य... घर के आंगन में खिला पहला गुलाब

Read more Earn more Learn more