गुज़रे न ये वक्त सफ़र कभी न खत्म हो,


हम-सफ़र तुम रहो और भले कोई न हो।


तुझसे मिलने को बे-क़रार रहता हूँ,


पर मेरी बेताबियों से भी डरता हूँ।


~गोपाल भोजक