तुम चाहे नाराज़ रहोमुझको सच लिखना है,इंकलाब की आग बुझा देतूफानों की औकात नही।तुम चाहे सच भूल गए होहम बगावत लिखते है,डर के चुप जो हो जायेऐसा हमारा लहू नही।©गोपाल भोजक
तुम चाहे नाराज़ रहो
मुझको सच लिखना है,
इंकलाब की आग बुझा दे
तूफानों की औकात नही।
तुम चाहे सच भूल गए हो
हम बगावत लिखते है,
डर के चुप जो हो जाये
ऐसा हमारा लहू नही।
©गोपाल भोजक