चाह नहीं, मैं सुरबाला के 

गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध

प्यारी को ललचाऊँ,

चाह नहीं सम्राटों के शव पर

हे हरि डाला जाऊँ,

चाह नहीं देवों के सिर पर

चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,

मुझे तोड़ लेना बनमाली,

उस पथ पर देना तुम फेंक!

मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने,

जिस पथ पर जावें वीर अनेक!


#पंडित_माखनलाल_चतुर्वेदी


#4अप्रैल1889


प्रख्यात #पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी #माखनलाल_चतुर्वेदी के जन्मदिवस पर कोटिशः अभिनंदन...