आँखे उसकी हिरणी जैसी,
होठ गुलाब की पंखुड़ी से,
हुस्न की क्या तारीफ करूं,
हर्फ कोई समझ ना आये,
पास जो आये खुश्बू आये,
इत्र मैं कोई लगाऊं कैसे,
तुम से जीवन खुशहाल हुआ,
रब का शुक्र मनाऊं कैसे।


आँखे उसकी हिरणी जैसी,
होठ गुलाब की पंखुड़ी से,
हुस्न की क्या तारीफ करूं,
हर्फ कोई समझ ना आये,
पास जो आये खुश्बू आये,
इत्र मैं कोई लगाऊं कैसे,
तुम से जीवन खुशहाल हुआ,
रब का शुक्र मनाऊं कैसे।