Poetry 1 min read 813.8K reads

माँ...


अक्सर याद आती है,माँ की वो लोरियां,मुझे नींद में सुलाती है,माथे की वो थपकियां,वो अब भी उनका टोकना,जरा सी बात पे रोकना,उनके सामने से मेराबचपन लौट आता है,मैं फिर बच्चा बन जाता हूँ।

— गोपाल भोजक
Read more Earn more Learn more